हानूश – सृजन का मूल्य और सत्ता की निर्दयता (भीष्म साहनी के नाटक की समीक्षा)

 “हानूश” – एक नाम, एक कलाकार, एक त्रासदी।


भीष्म साहनी द्वारा रचित यह लघु नाटक आकार में भले ही छोटा हो, लेकिन अपनी संवेदनशीलता और गहराई में बेहद विशाल है। यह नाटक सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उसके सपनों, संघर्षों और सत्ता के निर्मम चेहरे का दस्तावेज़ बन जाता है।

यह नाटक हमें 15वीं शताब्दी के प्राग शहर की पृष्ठभूमि में ले जाता है, जहाँ ताले बनाने वाला हानूश एक ऐसी घड़ी का निर्माण करता है जो आज भी प्राग के ऐतिहासिक चौक की दीवार पर शोभा बढ़ा रही है। परंतु इस घड़ी के पीछे छिपी कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही हृदयविदारक भी। 

हानूश एक गरीब कुफ़्लसाज़ (ताले बनाने वाला ) है, जो सत्रह वर्षों तक दिन-रात मेहनत करता है, एक ऐसा यंत्र बनाने के लिए जो समय की सटीकता और सौंदर्य का अनूठा मेल हो। वह अपने कार्य में इतना लीन हो जाता है कि अपने परिवार, पत्नी और बच्चों तक की सुध भूल जाता है। लेकिन उसकी पत्नी जीवन के हर दुःख को मौन भाव से झेलती रहती है। उसके भीतर न तो विद्रोह है, न शिकायत सिर्फ एक गूंगी पीड़ा है, और पति के प्रति एक अविचल समर्पण। उसे इस बात पर क्रोध आता भी है परंतु हानूश की लगन के आगे हार जाती है।

जब अंततः हानूश घड़ी बना लेता है और अपनी कला से सबको चकित करता है, तब उसकी प्रतिभा से भयभीत होकर राजा एक क्रूर निर्णय लेता है, हानूश की आँखें फोड़ दी जाती हैं, ताकि वह दुबारा ऐसी कोई घड़ी न बना सके।

यह दृश्य न केवल हानूश की व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह उस क्रूर यथार्थ को भी उजागर करता है जहाँ सत्ता, कला से डरती है और उसे कुचलने से भी नहीं हिचकिचाती।

और इसके बाद भी, हानूश की पत्नी वही स्त्री जो वर्षों तक उपेक्षित रही फिर भी उसे नहीं छोड़ती। वह उसकी सेवा करती है, उसकी देखभाल करती है। यह स्त्री-चरित्र नाटक का सबसे मौन, पर सबसे सशक्त पक्ष है।

"हानूश" एक कलाकार की पीड़ा नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की कहानी है जो अपने सपनों के लिए दुनिया से लड़ता है और कभी-कभी अपनों से भी।

भीष्म साहनी ने इस लघु नाटक में मानव संवेदनाओं, सामाजिक अन्याय और व्यक्तिगत त्याग को इतनी सहजता से पिरोया है कि यह पाठक के हृदय में देर तक गूंजता रहता है।

यह नाटक पढ़ना, मानो समय और संवेदना के बीच झूलती हुई एक अमर घड़ी को महसूस करना है, जिसकी हर टिक-टिक में कला, पीड़ा और प्रेम के कुछ अंश छिपे हैं।

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